महंगाई क्यों बढ़ती है? reason / types of inflation in hindi


आप सभी ने महंगाई शब्द तो बहुत बार सुना होगा साथ ही साथ महंगाई बढ़ने के कारण होने वाली समस्याओं के बारे में भी विभिन्न समाचार पत्रों में पड़ा होगा, यहां पर आप महंगाई क्या है ? तथा महंगाई क्यों बढ़ती है ? इसके विभिन्न कारणों को बहुत ही सरलता के साथ जानेंगे ,

साथ ही साथ इस लेख में आप यह भी जानेंगे कि महंगाई बढ़ना फायदेमंद है या नुकसानदायक तथा महंगाई बढ़ने के क्या फायदे होते हैं ?और महंगाई बढ़ने से क्या नुकसान होते हैं?

 चलिए इन सभी प्रश्नों के जवाब एक-एक करके नीचे प्राप्त करते हैं

महंगाई क्यों बढ़ती है?


सबसे पहले बात करते हैं आखिर महंगाई क्या होती है ? या महंगाई किसे कहते हैं ? what is inflation  

दोस्तों जब किसी मुद्रा की क्रय शक्ति में कमी आने के फल स्वरुप वस्तुओं के दामों में वृद्धि हो जाती है तो इस स्थिति को ही महंगाई या मुद्रास्फीति या इन्फेक्शन कहते हैं।

उदाहरण के लिए अगर आज के दिन आप बाजार से ₹20 में 1 किलो आलू खरीदते हैं ,तथा कुछ दिन पश्चात आप ₹20 में केवल आधा किलो आलू ही खरीद पा रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में ₹20 की क्रय शक्ति पहले की तुलना में आधी रह जाती है अर्थात पहले आप ₹20 में 1 किलो आलू खरीद पा रहे थे वहीं अब ₹20 में मात्र आधा किलो आलू ही खरीद पाएंगे और अगर आपको पूरी मात्रा अर्थात 1 किलो आलू खरीदना है तो आपको अधिक मात्रा में पैसा अर्थात ₹40 चुकाना होंगे ऐसी स्थिति को ही महंगाई या मुद्रास्फीति या इन्फ्लेशन कहते हैं।


अब बात करते हैं कि आखिर वस्तुओं के दाम में वृद्धि क्यों होती है या inflation महंगाई या मुद्रा स्पीति क्यों बढ़ती है ?


दोस्तों महंगाई या मुद्रास्फीति बढ़ने के निम्नलिखित दो प्रमुख कारण या प्रकार है।

1.मांग जन्य मुद्रास्फीति (डिमांड पुल इन्फ्लेशन )

2.लागत जन्य मुद्रास्फीति (कॉस्ट पुश इन्फ्लेशन )

 demand pull inflation  मांग जन्य मुद्रास्फीति तब उत्पन्न होती है जब  वस्तु या सेवाओं की मांग में वृद्धि हो जाती है ,अर्थात उन वस्तुओं और सेवाओं को प्राप्त करने के लिए ज्यादा लोग इच्छा रखते हो तथा लोगों की इच्छा या उन वस्तुओं सेवाओं को खरीदने के लिए तत्परता  तभी आएगी जब उनके पास अधिक मात्रा में पैसा उपलब्ध हो,

 अर्थात मांग जन्य मुद्रास्फीति पैसों की मात्रा के ऊपर निर्भर करती है ,लोगों के पास जितना अधिक पैसा होगा : 

Cost pull inflation  लागत जन्य मुद्रास्फीति

इस प्रकार की महंगाई में लोगों के पास ज्यादा पैसा तो उपलब्ध नहीं होता है परंतु वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन घटको अर्थात लागत में वृद्धि हो जाती है ,जैसे गेहूं उत्पादन में बाढ़ या सुखा होने के कारण लागत में वृद्धि हो जाना जिसके कारण गेहूं की कीमत में वृद्धि हो जाती है।

 महंगाई बढ़ने के फायदे एवं नुकसान 

इसे मुद्रास्फीति के लाभ एवं मुद्रास्फीति से हानियों के रूप में भी समझा जा सकता है । 

  • महंगाई बढ़ने के कुछ फायदे निम्नलिखित है
  • महंगाई या मुद्रास्फीति बढ़ने से उत्पादन कार्यों में वृद्धि होती है जिससे नए लोगों को रोजगार उपलब्ध होता है।
  • मुद्रा स्फीति या महंगाई के बढ़ने से देश के अंदर आर्थिक क्रियाकलापों में वृद्धि होती है तथा आर्थिक विकास होता है।
  • महंगाई के बढ़ने से उत्पादक वर्ग को प्रोत्साहन मिलता है ,क्योंकि उनके द्वारा उत्पन्न किए गए उत्पाद की अधिक कीमत उनको प्राप्त होती है।

 महंगाई बढ़ने से रोजगार भी बढ़ता है अर्थात महंगाई या मुद्रास्फीति तथा रोजगार में समानुपाती का संबंध होता है यह संबंध फिलिप्स नामक अर्थशास्त्री के द्वारा फिलिप्स कर्व  या फिलिप्स वक्र के माध्यम से भी दर्शाया जाता है।फिलिप्स वक्र या कर्व  के अनुसार महंगाई बढ़ने से रोजगार भी बढ़ता है तथा महंगाई के कम होने से बेरोजगारी का स्तर भी बढ़ता जाता है।

परंतु उपरोक्त सभी लाभ, नियंत्रित मात्रा में महंगाई या मुद्रास्फीति के बढ़ने पर ही प्राप्त होते हैं ,अति उच्च मात्रा में महंगाई बढ़ना अर्थात हाइपरइन्फ्लेशन की स्थिति में कोई फायदा नहीं होता है अपितु यह बहुत ही नुकसानदायक  स्थिति होती है।


महंगाई या मुद्रा स्थिति से होने वाली हानियां या नुकसान

  • महंगाई के चलते सबसे ज्यादा असर गरीब या निम्न आय वर्ग के लोगों पर होता है ,क्योंकि महंगाई के कारण वह अपनी जरूरत के सामान भी बड़ी मुश्किल से खरीद पाते  हैं।
  • महंगाई के कारण लोग अपने पैसों की बचत नहीं कर पाएंगे और बचत नहीं होने से निवेश भी नहीं होगा अर्थात निवेश के लिए प्रतिकूल स्थितियां उत्पन्न हो जाती है।
  • महंगाई की मात्रा बढ़ने से आम नागरिकों का देश की सरकार पर गुस्सा भी देखने को मिलता है तथा सामाजिक व्यवस्थाएं भी प्रभावित होने लगती है।


अब बात करते हैं कि महंगाई बढ़ने से या इन्फ्लेशन की स्थिति में किन किन लोगों को फायदा होता है? 

दोस्तों ऐसा नहीं है कि महंगाई से हमेशा लोगों को नुकसान ही होता है नीचे दिए गए श्रेणी के लोगों को महंगाई बढ़ने से फायदा मिलता है

उत्पादक वर्ग को

उधार लेने वाले को अर्थात ऋणी व्यक्ति को।

क्योंकि उत्पादक वर्ग को महंगाई के चलते अपने उत्पाद की अधिक कीमत प्राप्त होती है वहीं अगर कोई व्यक्ति किसी से उधार लेता है तो उधार लेते समय उन पैसों की क्रय क्षमता या क्रय शक्ति अधिक होती है तथा जब वह पैसा वापस चुकाता है तो वह लिए गए पैसों के बराबर क्रय शक्ति से कम क्रय शक्ति के रूप में अपनी उधार चुकाता है।

वही निम्नलिखित श्रेणी के लोगों को महंगाई की स्थिति में नुकसान उठाना पड़ता है जैसे-

  •  निश्चित आय सीमा वाले व्यक्तियों 
  • नौकरी करने वाले व्यक्तियों 
  • सभी प्रकार के उपभोक्ताओं को


अब बात करते हैं महंगाई या मुद्रास्फीति को रोकने के उपाय क्या है?

दोस्तों जैसा कि हमने ऊपर पड़ा है की अधिक मात्रा में लोगों के पास पैसा उपलब्ध हो जाने की स्थिति में लोग बाजार में अधिक मांग करते हैं ,जिसके चलते महंगाई बढ़ने लगती है ।

ऐसी स्थिति में महंगाई को रोकने के लिए सरकार एवं रिजर्व बैंक ऐसे उपाय करते हैं जिसके चलते लोगों के पास पैसों की उपलब्धता में कमी होने लगे, जिसे सामान्य शब्दों में तरलता में कमी करना या लिक्विडिटी में कमी करना कहते हैं।

रिजर्व बैंक के द्वारा रेपो रेट तथा रिवर्स रेपो रेट बढ़ाकर तरलता को कम किया जाता है वहीं सरकार के द्वारा टैक्स की दर में वृद्धि करके भी बाजार में तरलता को कम किया जाता है ,

जिससे कि कम पैसा बाजार में अर्थात लोगों के पास पहुंचे और लोगों की मांग में भी कमी आए जिससे कि महंगाई को नियंत्रित किया जा सके।

दोस्तों महंगाई शब्द के साथ-साथ कुछ अन्य शब्दावली भी आपने अवश्य सुनी होगी जैसे-

 मुद्रा अवस्थिति जिसे अंग्रेजी में  डिफ्लेशन कहते हैं -

यह स्थिति इन्फ्लेशन की पूर्णतया विपरीत स्थिति होती है ,इसमें वस्तुओं एवं सेवाओं के दाम कम होने लगते हैं अर्थात मुद्रा की क्रय शक्ति में वृद्धि हो जाती है, जिसके चलते कम मुद्रा चुकाकर अधिक मात्रा में सामान खरीदे जा सकते हैं।

परंतु यह स्थिति आर्थिक विकास के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है क्योंकि हमने इस लेख में पहले भी पड़ा है कि फिलिप्स वक्र के अनुसार मुद्रास्फीति बढ़ने से रोजगार में वृद्धि होती है वही डिफ़्लेशन की स्थिति से अर्थात महंगाई कम होने से बेरोजगारी भी बढ़ने लगती है।

साथ ही साथ उत्पाद की कम कीमत मिलने से उत्पादक  वर्ग, उत्पादन करना बंद कर देते हैं जिससे उद्योग धंधे भी बंद होने लगते हैं।

उदाहरण के लिए अगर आलू की कीमत बहुत ही कम हो जाए तो किसान अर्थात उत्पादक आलू का उत्पादन करना ही बंद कर देंगे क्योंकि उन्हें आलू की अच्छी कीमत नहीं मिल पाएगी।

अब बात करते हैं stagflation जिसे  मुद्रा संस्फिती के नाम से भी जाना जाता है, यह क्या होता है?

दोस्तों stagflation  या मुद्रा संस्फीत एक ऐसी स्थिति होती है ,जिसमें एक तरफ तो बाजार में वस्तुओं की कीमत अर्थात महंगाई बढ़ती है वहीं दूसरी ओर उत्पाद की बिक्री भी नहीं होती है अर्थात यह इन्फ्लेशन और deflation दोनों की संयुक्त स्थिति बन जाती है, तथा अधिक समय तक स्टैगफ्लेशन की स्थिति होने से बाजार में मंदी की स्थिति जिसे रिसेशन कहते हैं ,उत्पन्न हो जाती है।

अब बात करते हैं हाइपरइन्फ्लेशन क्या होता है ?

दोस्तों आप ने विभिन्न समाचार पत्रों एवं टीवी चैनल पर हाइपरइन्फ्लेशन के बारे में भी सुना होगा, अभी अभी वेनेजुएला में हाइपरइन्फ्लेशन की स्थिति देखने को मिली है। 

हाइपरइन्फ्लेशन महंगाई का सर्वोच्च स्तर होता है ,इसमें वस्तुओं की कीमत बहुत ज्यादा मात्रा में बढ़ जाती है तथा मुद्रा की क्रय शक्ति बहुत ही कम हो जाती है।


दोस्तों मुझे उम्मीद है कि महंगाई से संबंधित विभिन्न शब्दावली ,महंगाई का अर्थ, इसके प्रकार ,इसको रोकने के उपायों से संबंधित जानकारी आपको मिली है, इसी प्रकार के  अन्य ज्ञानवर्धक लेखों को पढ़ने के लिए आप इस वेबसाइट को सब्सक्राइब भी कर सकते हैं।


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